HOLI: विश्व प्रसिद्ध है बरसाना की लठ्ठमार होली, क्यों मनाया जाता है होली का त्यौहार

Holi: होली हिन्दू धर्म के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। होली रंगों का तथा हँसी ख़ुशी का त्योहार है। यह भारत का प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार भी है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व भारत सहित पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया जाता है। होलिका दहन के बाद लोग गले मिलकर एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं। इसके अलावा एक दूसरे के घर पर जाकर होली पर बनने वाले प्रसिद्ध व्यंजन गुझिया आदि का आनंद लेते हैं। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के गांव बरसाना की लठ्ठमार होली विश्व्र प्रसिद्ध है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि होली का त्योहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत झाँसी शहर से मानी जाती है। पहली बार होलिका दहन झाँसी के प्राचीन नगर एरच में किया गया था। एक ऊँचे पहाड़ पर वह जगह आज भी मौजूद है, जहाँ होलिका दहन हुआ था। इस नगर को भक्त प्रह्लाद की नगरी के नाम से जाना जाता है।

जिस दिन होलिका दहन होता है, उसे छोटी होली भी कहा जाता है। इसके अगले दिन रंग खेलकर तथा एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर तथा गले मिलकर इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में से सबसे शानदार त्योहार माना जाता है।

लीसेस्टर में दुनिया का सबसे बड़ा होली समारोह

वैसे तो भारत में होली का त्योहार सभी स्थानों पर मनाया जाता है, लेकिन भारत के अलावा ब्रिटेन के लीसेस्टर में दुनिया का सबसे बड़ा होली समारोह आयोजित किया जाता है। प्रत्येक वर्ष शहर के भिन्न भिन्न पार्कों में होली मनाई जाती है। इसकी पूर्व संध्या पर होलिका दहन की रोशनी देखने के लिए पूरा शहर एक साथ आता है। लीसेस्टर में मनाई जाने वाली होली विश्व भर में प्रसिद्ध है।

होली मनाने की प्रसिद्ध कथा

हिरण्यकश्यप राक्षस प्रवृति का राजा था और वह स्वयं को भगवान कहलाता था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। हिरण्याकश्यप ने अपने पुत्र को मारने के लिए योजना बनाई। उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर होलिका में बैठाने का संयंत्र रचा। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था, लेकिन प्रहलाद भी ईश्वर का बड़ा भक्त था। होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई। लेकिन उस आग में होलिका जलकर राख हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत मानकर होलिका दहन प्रत्येक बर्ष किया जाता है।

हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते हैं होली 

उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के देवा में हिन्दू-मुस्लिम एका साथ मिलकर होली का त्योहार मनाते हैं तथा एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हैं। इसके अलावा यहाँ फाग जुलूस भी निकाला जाता है। यह स्थानीय निवासियों के मुताबिक़ सूफ़ी संत हाजी बारिस अली शाह ने 118 साल पूर्व इसकी शुरुआत की थी। जिसे आज भी क़ायम रखा गया है। कहा जाता है कि हाजी वारिस अली शाह के मानने वालों में जितने मुस्लिम समुदाय के लोग थे उतने ही हिंदू समुदाय के लोग भी शामिल थे। हिंदू और मुस्लिम प्रति दिन उनसे मिलने के लिए जाते थे। होली के दिन जब उनसे हिन्दू संप्रदाय के लोग मिलने जाते तो उन्हें गुलाल भी लगाते और उनके साथ फाग खेलते थे। आज भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

विश्व प्रसिद्ध है बरसाना की लठ्ठमार होली

उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के गाँव बरसाना में होली का त्योहार एक अलग ही ढंग से मनाया जाता है। जिसे लट्ठमार होली के नाम से जाना जाता है। पूरे ब्रज क्षेत्र में मनाई जाने वाली होली को राधा और कृष्ण के प्रेम से जोड़कर देखा जाता है। बरसाना में बनाई जाने वाली लट्ठमार होली में नंदगाँव के पुरूष और बरसाने की महिलाएँ भाग लेती हैं। यहाँ मनाई जाने वाली होली भारत के अलावा विश्व भर में प्रसिद्ध है।

 

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